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*गोवर्धन-धारण*(कृष्ण-लीला) आयसु पाइ इंद्र भगवाना। छाइ गए ब्रज बादर नाना। प्रबल बृष्टि भइ मुसलाधारा। तड़ित-तड़क सँग अंधड़ सारा।। ग्वाल-बाल, पसु-पंछी सबहीं। काँपि गए जब ठंडक परहीं।। ...