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कुछ ख़्वाब सुहाने बैठे हैं , आँखों मे पलको के पीछे,, वो खींच रहे हैं तस्वीरें , आने वाले मधुरिम कल की,, जैसे सागर की सीपी के , अन्तस में मोती ...