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शीर्षक =हमदर्द साथी "आज कॉलेज भी ख़त्म हुआ अब कौन कहा मिलेगा कुछ नही मालूम " कैंटीन में बैठी आरज़ू ने कहा एक गहरी सास लेते हुए "हाँ यार पता ही ...