फिर चाहे अपना हो या पराया - कविता

1 Part

45 times read

3 Liked

बहके जो कोई तो संभाल लेना  फिर चाहे अपना हो या हो पराया  चंद मुस्कान रोशन कर देना फिर चाहे अपना हो या पराया सिसकने नहीं देना किसी को भी  फिर ...

×