सागर की उफनती लहरों - कविता

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सागर की उफनती लहरों सागर की उफनती लहरों से जूझती जिन्दगी की ,मानिंद जी रहे हैं हम सागर की लहरों के थपेड़ों के , किनारे क्यों न हुए हम पल--पल सिसकती ...

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