मुस्कान(दोहे)

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मुस्कान(दोहे) जहाँ कपट-छल हिय बसे,वहाँ नहीं मुस्कान। अधरों पर मुस्कान तो, है सज्जन-पहचान।। दुर्जन की मुस्कान में,छुपा रहे अभिमान। हँस-हँस कर वह मिल गले,देता कष्ट महान।। आँखों से आँखें मिलें,होंठों पर ...

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