दो दिन की जिंदगानी रे बन्दे क्यूँ करता अभिमान रे बन्दे - कविता

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दो दिन की जिंदगानी रे बन्दे क्यूँ करता अभिमान रे बन्दे महल अटारी सब छूटेंगे  खाली हाथ है , जाना रे बन्दे क्यूँ करता अभिमान रे बन्दे क्या लाया था , ...

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