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गुमशुदा (ग़ज़ल) सच कहूं, तो गुमशुदा ज़िन्दगी की तलाश है मुझे, या फ़िर कहें ,शायद अब बंदगी की तलाश है मुझे। गुमशुदा हो गईं है ,जो हरेक पल बढते हुए शोर में, ...