त्रिपदियाॅं

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*त्रिपदियाँ* देव-भूमि पर विपदा आई, संभव नहीं हानि-भरपाई। कोप प्रकृति का है यह भाई।। ----------------------------------- पिघल ग्लेशियर हुआ प्रवाहित, नदियों में घर हुए समाहित । हुए सभी जन हतोत्साहित।। ----------------------------------- प्रकृति ...

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