दायरा कमजोरों का

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जुबां पे रखते है गालियां जहान भर की, अक्ल का बोझ खुदका, औरों पे निकाल चलते हैं  मायने समझाते है औरों को, दो कश लगाने का तनाव दिमाग का, वो धुएं ...

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