1 Part
36 times read
4 Liked
कवि की अभिलाषा लिख जाऊॅं कुछ लेख लेखनी से अपने मैं कर पाऊं सब पूर्ण लोकहित के सपने मैं कर जाऊॅं इतिहास अमर अपनें अपनों का शोषण हो ना कभी शोषितों ...