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फ़ितरत नहीं जनाब अपनी चेहरे पर चेहरा लगाने की मुंह से राम राम बोल कर पीठ पीछे छुरीयां चलाने की हर मंजिल मुबारक हों तुम्हें हमें आदत है ठोकरें खाने ...