दृग सागर

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देखे नयन के एक झलक में,  अंबक में थी गहरी सागर। त्रिया नहीं ये वामा थी,  जो छिपा रही विकल पलको पर। धात्री थी नवजात शिशु की,  वक्षांशो से था देना ...

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