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दिल को कहीं सुकून का इम्काँ नहीं मिला, मुझको मदावा-ए-गमें-हिज़राँ नहीं मिला//1 कितने मक़ाम मुझको मिले जिंदगी मग़र, उस ज़ुल्फ़ सा कोई मुझे जिन्दां नहीं मिला//2 हर रोज़ हर क़दम पे ...