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सदा तुम्हारी कमी... नहीं जानता कल क्या होगा, कहाँ धूप, कहाँ नमीं रहेगी। पर मेरे इस जीवन में सीते अब सदा तुम्हारी कमी रहेगी। चाहे ईश्वर छीन लें दृष्टि। चाहे यह ...