हमारा बचपन

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क्या सुनाए तुम्हे बात बचपन की  समझ कहां हमको उस वक्त थी उम्र नादान थी गम से अनजान थी पहचान रिश्तों से थी बस रक्त की  एक दिन की कहानी थी ...

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