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लक्ष्य हैं जो दुश्मन ,उनसे मिला आँखे न तू डर मज़बूती से कदम बढ़ा, डर को डरा कर सफ़र की तलाश है, मंजिल का पता कर ढ़ल रहा हर शाम, उम्मीदों ...