चौहान और लक्ष्य

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निकल पड़ा चौहान  तलवार उठा दम खाने को सिर पर सजा है कफन इस मिट्टी में मिल जाने को। नेत्र उसके अब रहे नहीं इस जग को दिख जाने को हाथों ...

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