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अब तो मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाए जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए। जिसकी खुशबु से महक जाए पड़ोसी का भी घर ऐसा फूल हर रोज खिलाया जाए।। आग बहती ...