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चाहे कविता में गान लिखो या करो किसी की चाटुकारिता, चाहे सरकारी कवि बनो या करो सियासी पत्रकारिता, चाहे महबूबा के चरणों में तुम अपनी कविता कुर्बान करो, या सरकारों के ...