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हे मृगनयनी, हे चंद्रमुखी, जिसे देख हृदय हो जाये सुखी। तुम सुर्य देव की प्रभा किरण, तुम ही उपवन की स्वर्ण हिरण। तुम पुष्प गंध, तुम नील कमल, तुम धार हो ...