Dil ke zakhm

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सितम तेरे कब तक सहु!  ज़ख़्म दिल के में कब तक भरूँ!  तोड़ी गुफ्तगु ही तो करनी है तुझसे!  मे तेरे सजदे कब तक करू!.. Waseem khan ...

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