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हे कृपासिंधु, जग के दाता, हे दीनदयाला, भाग्य-विधाता, ये शीश तेरे चरणों में धरूं, पर कष्ट जो देता है जग को, मैं तेरी शिकायत किससे करुं ?? कहो, शिकायत किससे करुं ...