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मंच को नमन विषय विश्वासघात विधा कविता छल कपट विश्वासघात का दुनिया में है बोलबाला हंसों का दाना काग चुग रहे छीने मुंह का निवाला स्वार्थ सिद्ध करने वाले बोल मधुर ...