1 Part
419 times read
23 Liked
आखरी पड़ाव....... आज सोच का सागर गहराया हुआ था,,, यह कैसी घुटन है,,,, जो भीतर ही भीतर सताने लगी है मुझे,,,,, मन चीख रहा है ,,,,,और समुद्र का कोलाहल,,,,,, बाहर ...