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मंच को नमन विषय जमीन विधा कविता जो जमीन से जुड़े रहे संस्कार उन्हीं में जिंदा है देशद्रोही गद्दारों से हमारी भारत माता शर्मिंदा है हरी भरी हरियाली धरती बहती मधुर ...