कविता ःसपनों का घर

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बरखा रानी सूरज छुपा बादलों के पीछे🌥️ बनकर लहराती कड़कड़ाती बिजली⚡ घनन घनन बजे बदरी🌀 आई बरखा रानी देखो बरसा पानी🌧️ छाता लेकर घूमने निकले चम्मन चाचा☂️ गरम पकौड़े देखकर मुंह ...

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