शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की रचनाएंःविराजबहू--12

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विराजबहू भाग--१२ पन्द्रह माह बीत गए... शारदीय-पूजा के आनन्द का अभाव चारों ओर दिख रहा है। जल-थल-पवन और आकाश सब उदास-उदास। दिन का तीसरा पहर। नीलाम्बर एक कम्बल ओढ़े आसन पर ...

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