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दैनिक प्रतियोगिता शीर्षक - ठंडी हवाएं ठंडी हवाएं गुमसुम होकर, बढे गुमनामी की ही तरफ, ढलने लगी है शाम से ही, शाखाएं हिली, पत्ते झड़े, आंसुओं में तबाह हो कर। अधूरे ...