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"तुम्हारा शहर" अंजाना होकर भी जाना पहचाना सा लगा... क्यूं तुम्हारा शहर अपना सा लगा... कभी तुम से ना कोई राबता ही रहा... फिर क्यूं तुम्हारे शहर से वास्ता सा रहा... ...