1 Part
233 times read
4 Liked
ऑखली में मूसल से पिटता है जैसे घुन.. वैसे ही स्त्री के जीवन की पिसती जाती है धुन.. जितना बनती है वो जिम्मेदारी का दाना .. उतनी ही कूटी जाती है ...