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*असमंजस* निरंतर बह रही जीवन धारा सूखी, रेतीली,पथरीली राहें प्रवाह रोकती सरिता का उष्णता का चढ़ता पारा है!!! घोर अंधेरा छाया जैसे प्रधिप्त उजाला गुम हुआ, डगमग डोल रही नैया उचित ...