वार्षिक प्रतियोगिता- कविता-17-Feb-2022

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प्रकृति -------- प्रकृति अंतर नहीं करती, सबको समान दृष्टि से देखती है सब पर एक समान स्नेह लुटाती है। कोई उसे अपने  स्वेद-कणों से सींचता है, परिश्रम का फल पाता है। ...

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