शीर्षक -- आरज़ू, दैनिक कविता लेखन प्रतियोगिता -08-Mar-2022

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आरज़ू ------------- न कोई आरज़ू, न कोई जुस्तजू, न कोई हमसुखन, बस खुद से गुफ्तगू। हसरतें निकल गईं, उम्मीदें फिसल गईं, अरमां मचल कर रह गए, देखते उम्र निकल गई। फिक्र ...

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