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कमल नारायण जी उस जगह पर पहुंच गए जहां पर काफी सालों के पहले आचार्य चतुरसेन और आचार्य अग्निवेश ने आयाम द्वार बंद करने के लिए अनुष्ठान किया था। कमल नारायण ...