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बंद मुट्ठी ------------- उपार्जन करो, संचय करो, आवश्यकतानुसार उपभोग करो, पर मुट्ठी बंद मत रखो। दुनिया में हजारों हैं, जो तुम जैसे नहीं हैं, न कर्मठ, न सफल, न सुखी और ...