वो लाख परदों में हों चाहे

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#लेखनी दैनिक काव्य प्रतियोगिता वो लाख परदों में हों चाहे पर पहचान लेते हैं हम उनके इत्र की ख़ुशबू से उन्हें जान लेते हैं वो लाख परदों में हों चाहे... उनके ...

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