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सुहानी शाम ढल चुकी।ना जाने तुम कब आओगे।" रेडियो पर गीत बज रहा था।सुधा जी अपने कमरे मे बैठी।कमरे के बाहर बगीचे का नजारा ले रही थी।शाम ढल रही थी।काफी दिनों ...