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प्यार प्यार को देखो परिभाषित, करती प्रकृति सारी। धरती से अंबर है मिलता, सूरज उसको बहुत चाहता। दोनों एक दूजे के पूरक, प्यार को वह परिभाषित करते हैं। प्रकृति की छटा ...