शब्दों का जाल

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शब्दों के खेल खेलता हूँ, और इनके प्रयोग से डरता हूँ। क्या पता कब किसके? नजरों से गिरवा दे! क्या पता कब किससे? लड़ाई छिड़वा दे! गलत शब्दों से भरी सच्चाई, ...

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