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चित्र आधार रहा निहारुँ प्रियतम की, सुध बुध मैं तो भूल गई। मन की बात किसे बतलाऊंँ, दुनियादारी भूल गई। घुंघराले से केश है उसके, गजरा भी है सजा हुआ। मनमोहक ...