लेखनी प्रतियोगिता -04-May-2022

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चंचल मन चंचल बावरा-सा मन ,क्यों भटक रहा है इधर-उधर ? बादलों से जब पानी बरसे ,जाता है यह फिसल- फिसल! मयूर बन थर-थर थिरके ,दुल्हन सा जब रुप निखरे ! ...

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