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हम आज आपस में लड़ने की कोई बजह ढूढ़ते है। क्यौ गुम हो गये हमारे वो पुराने दिन बजह ढूढ़ते है।। क्यौ खुल रहे है इतने बृद्धाश्रम इसकी बजह ढूढ़ते है। ...