आल्हा ऊदल काव्यखंड (वीररस प्रधान)

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सात पान का बीड़ा हमनें,  भरी सभा में दिया गिराय कौन सुरमां है लश्कर में,  जो बीड़े को ले उठाय अरे जाकर कहदो गढ़ मांडो में  जो तेरी ईच्छा है लड़ने ...

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