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रौनक नहीं रही वो रौनक जो दिखती थी कभी त्योहारों में, अलबेले नटखट खेलों में खूब सजे बाजारों में। गाँव में मेले लगते थे बच्चे खुश हो टोली बनाकर जाते थे, ...