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वृक्ष ही आवरण प्रकृति दे रही है आवाज आओ सपनों मेरी पुकार स्वच्छ रखो मुझे सुन्दर तन दो बस इतनी सी है मेरी गुहार सब मिलकर हाथ बढ़ाओ एक एक सब ...