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आज फिर से सुनाओ ना अपनी हसरतों का फसाना नजरें चुराकर नजरों से शरमाकर कुछ कह जाना पलकों से पैगाम भेजकर दिल के आंगन में बुलाना खामोशियों की चादर ओढ हाल ...