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जज़्बात को शायरी के मैं नाम करुँगी ग़म को ग़ज़ल में छुपा के मैं बयान करुँगी मेरी हद ए मुहब्बत तुमको नहीं पता मर जाऊँगी मैं फिर भी तुम्हें प्यार करुँगी ...