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सावन सावन की रिमझिम पड़ी है फुहार, प्रकृति पर आई देखो मस्त बहार। मुदित है अंबर अवनी खिली है, मिल करे गाए गीत मनभावन। धानी चुनरिया इसने ओढ़ी, छटा इसकी है ...