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212-212-212-212 बस यही बात मैं सोचता रह गया, पास होकर भी क्यों फ़ासला रह गया//1 उसकी मंजिल कहीं दूसरी ओर थी, और मैं रास्ता देखता रह गया//2 सबको आँखों से मय ...